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A teaching from Acharya Ji

The Sixteen Vedic Saṁskāras

How Vedic saṁskāras refine human life—from Garbhādhāna through Antyeṣṭi.

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संस्कार की व्याख्या प्रस्तुत है

संस्कार का अर्थ

संस्करणम् = सम्यक् करणम् इति संस्कारः

किसी वस्तु को उत्तम बनाने का नाम संस्कार है। सम् का अर्थ उत्तम होता है और करणम् का अर्थ बनाना होता है, अतः संस्कार का अर्थ हुआ किसी वस्तु को उत्तम बनाना।

संस्क्रियते = सम्यक् क्रियते = उत्तमः क्रियते मानवः येन (व्यापारेण) सः संस्कारः।

सम्यक्—उत्तम, क्रियते—बनाये जाते हैं, मानवः—मनुष्य, येन—जिस कर्म से; उस कर्म का नाम संस्कार है। जिस कर्म, क्रिया अथवा व्यापार से मनुष्य को उत्तम बनाया जाता है, उस गर्भाधान से लेकर अन्त्येष्टि पर्यन्त कर्म, क्रिया और व्यापार का नाम संस्कार है।

शुद्धि और नव निर्माण

इन उपरोक्त निर्वचनों से यह बोध हुआ कि इस सृष्टि में जितने भी जड़ और चेतन पदार्थ हैं—सम्पूर्ण जड़ पदार्थ: पृथिवी, जल, अग्नि, वायु, आकाश, सूर्य, चन्द्र, नक्षत्रादि, समस्त ब्रह्माण्ड और स्थूल शरीर; सूक्ष्म शरीर: बुद्धि, अहंकार, मन, चित्त, पाँच ज्ञानेन्द्रियाँ, पाँच कर्मेन्द्रियाँ, शब्द, स्पर्श, रूप, रस और गन्ध तन्मात्राएँ; तथा कारण शरीर: प्रकृति, शरीर में स्थित सत्त्वगुण, रजोगुण, तमोगुण एवं पञ्चकोष—अन्नमय, प्राणमय, मनोमय और विज्ञानमय कोष—तथा चेतन पदार्थ आत्मा को शुद्ध और पवित्र करना संस्कार कहलाता है।

गर्भाधान से लेकर अन्त्येष्टि पर्यन्त यज्ञ-कर्म और अग्निहोत्र से लेकर अश्वमेध पर्यन्त यज्ञ-कर्म द्वारा जड़ और चेतन पदार्थों को शुद्ध करने वाले कर्म संस्कार कहलाते हैं। इस दृष्टि से संस्कार मानव के नव निर्माण की योजना है। संस्कार द्वारा मनुष्य उत्तम स्थिति प्राप्त करे—उसका जीवन निरोग, सुदृढ़, तेजस्वी, यशस्वी, वर्चस्वी, दीर्घायु और निर्भय हो; उसे उत्तम ज्ञान और गुण प्राप्त हों; तथा वह निर्विघ्न सुखपूर्वक सांसारिक व्यवहार और परमार्थ की सिद्धि करे। इसलिए वैदिक ग्रन्थों में सोलह संस्कारों का विधान किया गया है।

संस्कार कितने हैं?

आप सभी यजमान देवताओं को सादर सस्नेह नमस्ते। आपके समक्ष क्रमशः वैदिक सोलह संस्कार प्रस्तुत हैं, जो मनुष्य को मनुष्य बनाते हैं; स्थूल, सूक्ष्म और कारण शरीर को परिशुद्ध और परिमार्जित करते हैं; धर्म की ओर प्रवृत्त करते हैं; जीवन में सुख, शान्ति और समृद्धि लाते हैं; तथा ईश्वर-प्राप्ति और मुक्ति का मार्ग प्रशस्त करते हैं।

जिस संस्कार के विषय में मार्गदर्शन चाहिए, उसे चुनें।आपका चयन अनुरोध-पत्र में अपने आप जुड़ जाएगा।

जन्म से पूर्व

जन्म से पूर्व संकल्प, प्रार्थना और पारिवारिक सहयोग।

बाल्यावस्था

बालक के आरम्भिक जीवन के महत्वपूर्ण चरणों का संस्कार।

शिक्षा और अनुशासन

अनुशासित अध्ययन में प्रवेश, साधना और उसकी पूर्णता।

गृहस्थ जीवन

साझी जिम्मेदारी, दाम्पत्य और पारिवारिक जीवन।

उत्तर जीवन और पूर्णता

सेवा, चिन्तन, त्याग और जीवन का अंतिम संस्कार।

इनकी क्रमशः शनैः शनैः व्याख्या आपके समक्ष लिखेंगे।

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